Saturday, April 19, 2014
Tuesday, April 8, 2014
Monday, April 7, 2014
Kaun Banega Pradhanmantri Nukkad Behas from Surendranagar, Gujarat
गुजरात के सौराष्ट्र इलाके का हिस्सा है सुरेंद्रनगर। सुरेंद्रनगर जिले को पहले झालावाड़ के तौर पर भी जाना जाता था। आजादी के समय देशी रियासतों का भारत में विलय होने के पहले तक यहां लिंबडी, ध्रांगध्रा, वढवान, मूली, लखतर, पाटड़ी, सायला, बजाना और चूड़ा जैसी कई छोटी-बड़ी रियासतें हुआ करती थीं। खुद सुरेंद्रनगर नाम 1947 में अस्तित्व में आया, वढ़वान रियासत के तत्कालीन शासक सुरेंद्र सिंहजी के नाम पर। सुरेंद्रनगर जिला होने के साथ ही लोकसभा क्षेत्र भी है।
सुरेंद्रनगर लोकसभा सीट से फिलहाल सोमा गांडा पटेल कांग्रेस उम्मीदवार हैं। सोमा गांडा 2004 में बीजेपी की तरफ से सुरेंद्रनगर की सीट जीते थे, तो 2009 में कांग्रेस की तरफ से। इससे पहले 1989 और 1991 में भी सोमा गांडा पटेल बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर यहां से चुनाव जीते थे। 1996 में ये सीट कांग्रेस के लिए सनत मेहता ने जीती, तो 1998 में बीजेपी के लिए भावनाबेन दवे ने। 1999 के चुनाव में ये सीट कांग्रेस के लिए सवसी भाई मकवाणा ने जीती थी।
बीजेपी ने इस सीट से इस बार देवजी फत्तेपुरा को चुनाव मैदान में उतारा है। सोमा गांडा पटेल और देवजी फत्तेपुरा दोनों ही कोली समुदाय से आते हैं, जिनकी इस लोकसभा क्षेत्र में काफी संख्या है।
सुरेंद्रनगर लोकसभा क्षेत्र के अंदर गुजरात विधानसभा की सात सीटें हैं-विरमगाम, धंधुका, दसाड़ा, लिंबडी, वढवान, चोटिला और ध्रांगध्रा। इनमें से विरमगाम और धंधुका सीटें जहां अहमदाबाद जिले का हिस्सा हैं, वही बाकी पांच सीटें सुरेंद्रनगर जिले का।
2012 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी इस लोकसभा क्षेत्र के अंदर आने वाली पांच सीटें जीतने में कामयाब रही, सिर्फ दो सीटें- विरमगाम और लिंबडी कांग्रेस के खाते में गई। हालांकि जब लिंबड़ी सीट पर उपचुनाव हुआ, तो यहां से बीजेपी ने जीत हासिल कर ली।
लोकेशन- लिंबडी, सुरेंद्रनगर
नुक्कड़ बहस में भाग लेने वाले नेताओं के नाम
बीजेपी
1. शंकरभाई वेगड़, राज्य सभा सदस्य
2. चतुरभाई पटेल, शहर बीजेपी प्रमुख, लिंबडी
3. प्रणव जोशी, बीजेपी युवा मोर्चा प्रमुख, लिंबडी
4. पृथ्वीराजसिंह झाला, बीजेपी तालुका महामंत्री, लिंबडी
कांग्रेस
1. खुशालभाई जादव, तालुका कांग्रेस प्रमुख, लिंबडी
2. रैयाभाई राठौड़, तालुका कांग्रेस प्रमुख, सायला
3. नजमाबेन सोलंकी, जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष, सुरेंद्रनगर
4. अनिल सिंघल, जिला कांग्रेस प्रवक्ता, सुरेंद्रनगर
Saturday, April 5, 2014
Kaun Banega Pradhanmantri Nukkad Behas from Porbandar, Gujarat
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्मस्थली के तौर पर पूरी दुनिया में मशहूर है पोरबंदर। अरब सागर के किनारे बसा पोरबंदर शहर न सिर्फ इसी नाम वाले जिले का मुख्यालय है, बल्कि एक समय की बड़ी रियासत भी रहा है। पोरबंदर में भगवान कृष्ण के बाल सखा सुदामा का मंदिर भी है। यहां पर बापू की जन्मस्थली, जहां कीर्ति मंदिर नाम से स्मारक बना हुआ है, दुनिया भर के सैलानी आते हैं।
पोरबंदर लोकसभा सीट के अंदर गुजरात विधानसभा की सात सीटें हैं – गोंडल, जेतपुर, धोराजी, पोरबंदर, कुतियाणा, माणावदर और केशोद। इनमें से गोंडल, जेतपुर और धोराजी सीटें जहां राजकोट जिले का हिस्सा हैं, वही पोरबंदर और कुतियाणा पोरबंदर जिले के अंदर आती हैं, जबकि माणावदर और केशोद नामक विधानसभा सीटें जूनागढ़ जिले का हिस्सा हैं। इस तरह तीन जिलों की कुछ-कुछ विधानसभा सीटों को मिलाकर बनी पोरबंदर लोकसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है। यहां से विठ्ठल राधड़िया सांसद हैं और 2014 लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी के उम्मीदवार भी। हालांकि मजेदार बात ये है कि जब 2009 में लोकसभा चुनाव हुए थे, तो इन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की थी। 2012 में राधड़िया ने धोराजी विधानसभा सीट से जीत हासिल कर संसद की अपनी सदस्यता से तीन जनवरी 2013 को त्याग पत्र दे दिया। इसके एक महीने बाद ही राधड़िया ने 25 फरवरी 2013 को विधानसभा से भी इस्तीफा दे दिया और बीजेपी ज्वाइन कर ली। ऐसे में 2 जून 2013 को पोरबंदर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में बतौर बीजेपी प्रत्याशी राधड़िया ने कांग्रेस उम्मीदवार वीनूभाई अमपरा को हराकर ये सीट फिर से जीती।
कांग्रेस ने इस दफा पोरबंदर सीट पर अपना प्रत्याशी तो नहीं खड़ा किया है, लेकिन वो एनसीपी के उम्मीदवार कांधल जाडेजा को समर्थन दे रही है, जो पोरबंदर जिले की कुतियाणा सीट से एनसीपी विधायक भी है। कांधल जाडेजा की आपराधिक पृष्ठभूमि रही है और ये एक समय गॉडमदर के नाम से चर्चित रही महिला डॉन संतोकबेन जाडेजा का बड़ा बेटा है। खुद संतोकबेन ने भी कुतियाणा से विधानसभा का चुनाव जीता था। बीजेपी उम्मीदवार राधड़िया भी दबंग हैं और 2012 में ये तब सुर्खियों मे आए थे, जब एक टोलबूथ पर इन्होंने पथकर मांगे जाने पर बंदूक निकाल ली थी।
पोरबंदर लोकसभा क्षेत्र के अंदर आने वाली सात विधानसभा सीटों पर जब 2012 में चुनाव हुए थे, तो गोंडल, पोरबंदर और केशोद सीट पर जहां बीजेपी ने जीत हासिल की थी, वही जेतपुर, धोराजी और माणावदर की सीट पर कांग्रेस ने। लेकिन धोराजी सीट से विधायक रहे विठ्ठल राधड़िया और जेतपुर सीट से विधायक रहे उनके बेटे जयेश राधड़िया ने जब कांग्रेस छोड़ बीजेपी ज्वाइन कर ली, तो इन दो सीटों पर हुए उपचुनाव में जहां बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर जेतपुर से जयेश ने जीत हासिल की, तो धोराजी सीट से बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर प्रवीण माकड़िया ने। जयेश फिलहाल मोदी सरकार में राज्य मंत्री हैं।
लोकेशन – चौपाटी, पोरबंदर
नुक्कड़ बहस में शामिल नेताओं के नाम
परेश देवाणी, पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष, पोरबंदर
हितेश ठकरार, शहर बीजेपी प्रमुख, पोरबंदर
विजय वडूकर, जिला बीजेपी प्रवक्ता, पोरबंदर
सामथभाई ओडेदरा, कांग्रेस नेता, पोरबंदर
जीतूभाई आगठ, महामंत्री, जिला कांग्रेस, पोरबंदर
मनसुख धोकाई, आम आदमी पार्टी नेता, पोरबंदर
Friday, April 4, 2014
Kaun Banega Pradhanmantri Nukkad Behas from Junagadh, Gujarat
जूनागढ़ गुजरात के सौराष्ट्र इलाके का हिस्सा है। ये पहले सोरठ के नाम से भी जाना जाता था। आजादी से पहले जूनागढ़ देश की बड़ी रियासतों में से एक था। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद जूनागढ़ रियासत के तत्कालीन नवाब महाबत खान ने अपनी रियासत का विलय हिंदुस्तान की जगह पाकिस्तान में करने का फैसला किया, वो भी तब जबकि रियासत की अस्सी फीसदी से अधिक आबादी हिंदुओं की थी। इसके खिलाफ जूनागढ़ में विद्रोह हो गया और नवाब को पाकिस्तान भागना पड़ा। जूनागढ़ में आरजी हुकूमत के नाम से जन प्रतिनिधियों की लोकप्रिय सरकार बनी और जनमत संग्रह के बाद इस रियासत का भारत में विलय हुआ। पहले जूनागढ़ सौराष्ट्र राज्य का हिस्सा बना, उसके बाद बृहद बंबई राज्य में इसका समावेश हुआ और फिर 1960 में गुजरात के अस्तित्व में आने के बाद ये इस नये राज्य का हिस्सा बना। जूनागढ़ न सिर्फ एक जिला बल्कि लोकसभा क्षेत्र भी है। राज्य के जिन शहरों में महानगरपालिका अस्तित्व में है, उनमें से एक जूनागढ़ भी है।
जूनागढ़ लोकसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा
है। हालांकि बीजेपी ने इस दफा अपने मौजूदा सांसद दीनू सोलंकी को टिकट नहीं दिया
है, बल्कि राजेश चूड़ासमा को टिकट दिया है, जो इस जिले की मांगरोल विधानसभा सीट से
विधायक हैं। दीनू सोलंकी आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या के आरोपी हैं और
हाल ही में जमानत पर जेल से छूटे हैं। इस सीट से 1991, 1996, 1998 और 1999 में
बीजेपी की भावनाबेन चिखलिया ने जीत हासिल की, जो वाजपेयी सरकार में पर्यटन
राज्यमंत्री भी बनीं। 2004 में जूनागढ़ की सीट कांग्रेस के लिए जशु बारड़ ने जीती।
जशु बारड़ 2014 के लोकसभा चुनावों में भी जूनागढ़ से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और
साथ में तालाला से विधायक भी। आम आदमी पार्टी ने यहां से अतुल सेखड़ा को चुनाव
मैदान में उतारा है, जो सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
जूनागढ़ लोकसभा क्षेत्र के अंदर गुजरात विधानसभा
की सात सीटें आती हैं – जूनागढ़, वीसावदर, मांगरोल, सोमनाथ, तालाला, कोडिनार और
उना। 2012 विधानसभा चुनावों में इनमें से तीन सीटों – जूनागढ़, मांगरोल और कोडिनार
पर बीजेपी ने कब्जा किया, तो कांग्रेस के हिस्से में सोमनाथ, तालाला और उना की
सीटें आईं। एक सीट गुजरात परिवर्तन पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष और राज्य के पूर्व
मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने जीती। सोमनाथ सीट के कांग्रेसी विधायक जशाभाई वारड़
सदन से इस्तीफा देकर अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, तो केशुभाई पटेल ने भी सदन
से इस्तीफा दे दिया है और उनकी पार्टी का विलय बीजेपी में हो गया है।
लोकेशन – सौराष्ट्र भूमि कंपाउंड, जूनागढ़
नुक्कड़ बहस में शामिल होने वाले नेताओं के नाम
संजय कोरड़िया, शहर बीजेपी अध्यक्ष, जूनागढ़
ज्योतिबेन वाछानी, बीजेपी नेता व पूर्व मेयर,
जूनागढ़ महानगरपालिका
लाखाभाई परमार, कांग्रेस नेता व मेयर, जूनागढ़
महानगरपालिका
गिरीश कोटेचा, कांग्रेस नेता व डिप्टी मेयर,
जूनागढ़ महानगरपालिका
अतुल सेखड़ा, आम आदमी पार्टी उम्मीदवार, जूनागढ़
Tuesday, April 1, 2014
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