Thursday, March 20, 2014

KBPM Nukkad Bahas from Jamnagar, Gujarat, March 13, 2014



एक समय की सौराष्ट्र की बड़ी रियासतों में से एक नवानगर का मुख्यालय जामनगर। विश्व क्रिकेट के सार्वकालिक मशहूर नामों से एक रणजीत सिंह इसी नवानगर रियासत के महाराजा थे। जामनगर शहर की कई इमारतें और जाम रणजीत सिंह की निशानियों से भरा पड़ा है, जिसमें से एक है जामनगर का सुमेर क्लब भी। घरेलू क्रिकेट के दो मशहूर मुकाबले रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी जाम रणजीत सिंह और उनके भतीजे दिलीप सिंह के नाम पर ही हैं।
जामनगर जिले के अंदर ही रिलायंस और एस्सार समूह की मशहूर रिफाइनरियां भी हैं। भारतीय सेना के लिहाज से भी जामनगर महत्वपूर्ण शहर है, जहां सेना के तीनों अंग मौजूद हैं। जामनगर जिले में ही देश का एक मात्र मरीन नेशनल पार्क भी है।
जामनगर लोकसभा सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है। यहां से कांग्रेसी सांसद विक्रम माडम ने 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव जीता। 2014 लोकसभा चुनावों में भी विक्रम माडम ही कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। हालांकि इस सीट पर 1989 से लेकर 1999 तक लगातार बीजेपी का कब्जा रहा और चंद्रेश पटेल यहां के सांसद रहे। बीजेपी ने इस दफा विक्रम माडम की भतीजी पूनम माडम को अपने उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतार दिया है। पूनम जिले की खंभालिया विधानसभा सीट से विधायक हैं। ऐसे में जामनगर में इस बार चुनावी मुकाबला चाचा और भतीजी के बीच होने जा रहा है।
जामनगर लोकसभा सीट के अंदर विधानसभा की सात सीटें हैं – कालावाड, जामनगर ग्रामीण, जामनगर उत्तर, जामनगर दक्षिण, जाम जोधपुर, खंभालिया और द्वारका। 2012 विधानसभा चुनावों में इन सात सीटों में से पांच पर बीजेपी ने कब्जा किया तो दो सीटों- जामनगर ग्रामीण और जामनगर उत्तर पर कांग्रेस ने कब्जा किया।
नुक्कड़ बहस में शामिल गेस्ट
बीजेपी
1.       दिनेश पटेल, बीजेपी नेता और मेयर, जामनगर शहर
2.       हसमुख हिंडोचा, शहर बीजेपी प्रमुख, जामनगर
3.       दिलीप सिंह चूड़ासमा, जिला बीजेपी महामंत्री
कांग्रेस
1.       पीसी खेतिया, शहर कांग्रेस अध्यक्ष, जामनगर
2.       वीरेंद्र सिंह जाडेजा, महामंत्री, जिला कांग्रेस
आम आदमी पार्टी
1.       जयेंद्र भाई परमार, जामनगर जिला संयोजक, आम आदमी पार्टी
 लोकेशन – सुमेर क्लब, जामनगर

KBPM Nukkad Bahas from Godhra, Panchmahal, Gujarat, March 16, 2014



पंचमहाल लोकसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है। ये लोकसभा सीट पंचमहाल जिले की चार विधानसभा सीटों, खेडा जिले की एक सीट और महीसागर जिले की दो विधानसभा सीटों को मिलाकर बनी है। 2004 तक इस लोकसभा सीट का नाम गोधरा था। नये सीमांकन के बाद इसे पंचमहाल नाम दिया गया। हालांकि 1962 के चुनावों तक इस सीट का नाम पंचमहाल ही था।
मशहूर सांसद पीलू मोदी यहां से 1967 और 1971 का चुनाव स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीते थे। 1999 और 2004 में यहां बीजेपी ने जीत दर्ज की।
2009 में यहां बीजेपी के प्रभातसिंह चौहाण ने कांग्रेस के हैवीवेट नेता और तब की यूपीए सरकार में कपड़ा मंत्री शंकरसिंह वाघेला को हराया। हालांकि शंकरसिंह वाघेला ने गोधरा सीट 1991 में बतौर बीजेपी नेता जीती थी, लेकिन 1996 में वो यहां से चुनाव हार गये थे। कांग्रेस ने पंचमहाल लोकसभा सीट से इस दफा रामसिंह परमार को चुनाव मैदान में उतारा है। परमार खेडा जिले की ठासरा विधानसभा सीट से विधायक हैं और विश्वप्रसिद्ध अमूल डेरी के चेयरमैन।
पंचमहाल जिले का मुख्यालय गोधरा वर्ष 2002 की 27 फरवरी को साबरमती एक्सप्रेस में की गई आगजनी के कारण चर्चा में आया, जिसके अगले दिन से गुजरात के कई हिस्सों में दंगे भड़क उठे।
इस शहर से सरदार वल्लभभाई पटेल और मोरारजी देसाई का भी गहरा नाता रहा है। सरदार पटेल ने गोधरा में वकालत की प्रैक्टिस की थी, जबकि मोरारजी यहां पर डिप्टी कलेक्टर रहे थे और यही उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी।
पंचमहाल लोकसभा सीट के अंदर विधानसभा की सात सीटें हैं- ठासरा, बालासिनोर, लुणावाडा, शहेरा, मोरवा हडफ, गोधरा और कालोल। 2012 विधानसभा चुनावों के दौरान इनमें से पांच सीटें कांग्रेस ने जीती, तो दो सीटें बीजेपी ने। लेकिन मोरवा हडफ की कांग्रेस विधायक के देहांत के बाद हुए उपचुनाव में वहां बीजेपी ने जीत हासिल की और इस तरह कांग्रेस का मौजूदा आंकड़ा जहां चार है, वही बीजेपी का तीन।

नुक्कड़ बहस में शामिल राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि

बीजेपी
1.       काकुल पाठक, पंचमहाल लोकसभा सीट बीजेपी प्रभारी
2.       पी बी बारिया, ओबीसी सेल प्रमुख, पंचमहाल
3.       समरसिंह पटेल, बीजेपी किसान मोर्चा अध्यक्ष, पंचमहाल

कांग्रेस
1.       अजीत सिंह भाटी, जिला कांग्रेस महासचिव, पंचमहाल
2.       य़शवर्धन सिंह रावलजी, कांग्रेस नेता

आम आदमी पार्टी - पीयूष परमार

KBPM: Ahmedabad's voters mood ahead of LS poll schedule announcement

Kaun Banega Pradhanmantri Nukkad Behas from Bhruch in Gujarat



लोकसभा चुनावों के हिसाब से भरूच बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है। 1989 से लगातार यहां बीजेपी लोकसभा का चुनाव जीतती रही है। भरूच के मौजूदा लोकसभा सांसद मनसुखभाई वसावा है, जो 1999 से यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल का गृह जिला भी भरूच ही है। खुद अहमद पटेल यहां से 1977, 1980 और 1984 में कांग्रेस सांसद रहे।

2014 लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी ने फिर से मनसुखभाई वसावा को ही अपना उम्मीदवार बनाया है।

भरूच लोकसभा सीट के अंदर विधानसभा की सात सीटें हैं - करजण, देदियापाड़ा, जंबूसर, वागरा, झगड़िया, भरूच और अंकलेश्वर। 2012 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी यहां की सात में से छह सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि कांग्रेस का यहां खाता भी नहीं खुला। एक सीट नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के खाते में गई। दरअसल राज्य में जेडीयू के एक मात्र एमएलए छोटूभाई वसावा भरूच जिले की झगड़िया सीट से ही चुनाव जीतते हैं।

भरूच लोकसभा सीट में आदिवासी मतदाताओं की संख्या अच्छी है, यही नहीं यहां मुस्लिम मतदाता भी बड़ी मात्रा में हैं। औद्योगिक तौर पर भरूच काफी विकसित है। भरूच, अंकलेश्वर और दहेज जैसे इलाके केमिकल, फार्मा, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों से भरे पड़े हैं। खुद भरूच शहर नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जिले का एक बड़ा हिस्सा समुद्र तटीय है।  

भरूच की नुक्कड़ बहस में भाग लेने वाले बीजेपी और कांग्रेस के प्रमुख नेता इस प्रकार हैं-

बीजेपी
1. आसीफा खान, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, बीजेपी

2. दक्षाबेन पटेल, बीेजेपी नेता और भरूच नगरपालिका अध्यक्ष

3. मनहर गोहिल, बीजेपी नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष, भरूच


कांग्रेस
1. राजेंद्र सिंह राणा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष, भरूच

2. नाजु फड़वाला, प्रवक्ता, कांग्रेस, भरूच

3. अरविंद धोरावाला, प्रदेश मंत्री कांग्रेस

Nukkad Behes: Kaun Banega Pradhanmantri from Surat, Gujarat



लोकसभा चुनावों के लिहाज से सूरत बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है। 1989 से लगातार इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है यानी बीजेपी यहां से सात चुनाव जीत चुकी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कांशीराम राणा यहां 1989 से लेकर 2004 तक छह बार चुनाव जीते। सूरत की मौजूदा सांसद दर्शनाबेन जरदौश हैं। 2014 लोकसभा चुनावों में भी दर्शनाबेन ही बीजेपी की प्रत्याशी हैं।
सूरत सीट से पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई भी चुनाव लड़ते रहे। 1977 में जब वो देश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार के प्रधानमंत्री बने, तब भी वो सूरत से ही चुनाव जीते थे।

जहां तक विधानसभा चुनावों का सवाल है, उसमें भी बीजेपी यहां जोरदार प्रदर्शन करती आ रही है। सूरत लोकसभा सीट के अंदर गुजरात विधानसभा की सात सीटें हैं - ओलपाड, सूरत पूर्व, सूरत उत्तर, वराछा रोड, करंज, कतारगाम और सूरत पश्चिम। 2012 विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने इन सभी सात सीटों पर कब्जा किया।

सूरत महानगरपालिका पर भी बीजेपी का ही कब्जा है।

सूरत एक ऐतिहासिक शहर है। सूरत में ही अंग्रेजों ने अपनी पहली फैक्ट्री डाली थी। सूरत की मौजूदा पहचान पूरी दुनिया में डायमंड सिटी के तौर पर है, क्योंकि सबसे अधिक हीरों की कटिंग और पॉलिश का कारोबार यहां होता है। टेक्सटाइल उद्योग का भी बड़ा केंद्र है सूरत। सूरत आप्रवासियों के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है। सूरत एक ऐसा शहर है, जहां पूरे देश से लोग रोजगार के सिलसिले में आते हैं, खास तौर पर उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों से।

सूरत की नुक्कड़ बहस में शरीक होने वाले बीजेपी और कांग्रेस के प्रमुख नेता इस प्रकार हैं-

बीजेपी

1.निरंजन जाजमेरा, बीजेपी नेता और मेयर, सूरत शहर


2. हर्ष संघवी, बीजेपी विधायक और राष्ट्रीय महामंत्री, बीजेपी युवा मोर्चा



कांग्रेस 

1. धनपत जैन, कांग्रेस नेता, सूरत


2. संजय पटवा, क्षेत्रीय प्रवक्ता, कांग्रेस

Kaun Banega Pradhanmantri Nukkar Behas Kutch in Gujarat



कच्छ लोकसभा सीट पर 1996 से ही लगातार बीजेपी का कब्जा बना हुआ है। यहां पर 1996, 1998, 1999 और 2004 में बीजेपी की तरफ से पुष्पदान गढ़वी ने चुनाव जीता, तो 2009 का चुनाव बीजेपी की तरफ से पूनमबेट जट नामक महिला युवा नेता ने जीता। 2009 से ये सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट बन चुकी है।

बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनावों में अपना उम्मीदवार बदल दिया है। पूनमबेट जट की टिकट काटकर पार्टी ने विनोदभाई चावड़ा को यहां अपना उम्मीदवार बनाया है। वही कांग्रेस ने कच्छ से दिनेश परमार को मैदान में उतारा है, जिन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की है। इससे पहले परमार जामनगर जिले की कालावड विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं।
कच्छ लोकसभा सीट के अंदर विधानसभा की कुल सात सीटें हैं – अबडासा, मांडवी, भुज, अंजार, गांधीधाम, रापर और मोर्बी। पहली छह सीटें जहां कच्छ जिले का हिस्सा हैं, वही मोर्बी सीट मोर्बी नामक नये जिले का अंग। 2012 के विधानसभा चुनावों में इन सात सीटों में से छह पर बीजेपी का कब्जा रहा। इस लोकसभा की एक मात्र विधानसभा सीट अबडासा पर कांग्रेस ने जीत हासिल की, लेकिन उस कांग्रेसी विधायक छबिल पटेल ने भी इसी 24 फरवरी को विधान सभा से इस्तीफा देकर बीजेपी ज्वाइन कर ली।

आजादी के पहले कच्छ बड़ी रियासत हुआ करती थी। आजादी के बाद इसका भारत में विलय हुआ। 1960 में गुजरात के अस्तित्व में आने के बाद ये गुजरात राज्य का हिस्सा बना। 2001 में भयावह भूकंप की पीड़ा झेली थी कच्छ ने। हालांकि उसके बाद औद्योगिक तौर पर कच्छ का काफी विकास हुआ। देश का मशहूर बंदरगाह कांडला भी कच्छ जिले का ही हिस्सा है। कच्छ सीमावर्ती जिला है। विभाजन के वक्त बड़े पैमाने पर सिंधी शरणार्थी कच्छ में आए और इनके लिए गांधीधाम और आदीपुर जैसे नगर बसाये गये। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि भी कच्छ के रन्न में पाकिस्तान की घुसपैठ थी।